
जनपद पंचायत मरवाही में ‘जांच बनाम भुगतान’ का खेल! —”पंचायत इंस्पेक्टर शिव प्रसाद मरकाम”खुद ही पास, खुद ही जांच, खुद ही क्लीनचिट..?
गौरेला पेंड्रा मरवाही,- जनपद पंचायत मरवाही में 15वें वित्त आयोग की राशि को लेकर एक बेहद गंभीर और रहस्यमयी सिस्टम सामने आ रहा है, जिसने पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। दस्तावेजों और स्थानीय सूत्रों के अनुसार, पंचायत इंस्पेक्टर शिव प्रसाद मरकाम की भूमिका इस पूरे मामले में केंद्र में दिखाई दे रही है।

मामले के अनुसार, जब भी पंचायतों में 15वें वित्त की राशि का भुगतान होना होता है, तो प्रक्रिया कुछ इस तरह चलती है— पहले पंचायत इंस्पेक्टर द्वारा प्रस्ताव की जांच, फिर सरपंच/सचिव के डिजिटल सिग्नेचर (DSC), उसके बाद OTP जनरेशन और अंत में अप्रूवल देकर राशि जारी। यानी शुरुआत से अंत तक पूरा सिस्टम एक तय चैनल से संचालित होता है।
लेकिन असली सवाल तब खड़ा होता है जब इन्हीं भुगतानों में भ्रष्टाचार की शिकायत सामने आती है। शिकायत के बाद जांच के आदेश दिए जाते हैं— और हैरानी की बात यह कि जिस पंचायत इंस्पेक्टर ने भुगतान प्रक्रिया में भूमिका निभाई, उसी को जांच का जिम्मा सौंप दिया जाता है।
सबसे बड़ा सवाल:

क्या भुगतान प्रक्रिया में शामिल अधिकारी ही जांच अधिकारी बन सकता है? यदि हां, तो निष्पक्षता की गारंटी कौन देगा?
सूत्र बताते हैं कि जांच के नाम पर ‘चैनल बदलने’ का खेल भी चलता है, जहां लेन-देन के जरिए फाइलों का रुख मोड़ा जाता है और मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। इससे यह संदेह और गहरा हो जाता है कि कहीं पूरा सिस्टम ही सेटिंग पर तो नहीं चल रहा?
जिम्मेदारी तय कौन करेगा? जब भुगतान के लिए सरपंच-सचिव का DSC और OTP जरूरी है, और अप्रूवल भी एक तय प्रक्रिया से होता है, तो आखिर जिम्मेदारी किसकी बनती है?
नियमों की अनदेखी या मनमानी? वित्तीय मामलों में पंचायत इंस्पेक्टर द्वारा न केवल भुगतान प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभाना, बल्कि बाद में खुद ही जांच और कार्यवाही के आदेश देना— यह प्रशासनिक नियमों और पारदर्शिता पर सीधा प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है।
और तो और, कार्रवाई के दौरान यह तर्क दिया जाता है कि “सीईओ साहब छुट्टी पर थे”, इसलिए निर्णय लिया गया। सवाल उठता है कि क्या वित्तीय मामलों में इतनी बड़ी शक्तियां पंचायत इंस्पेक्टर को दी गई हैं?
मांग उठी निष्पक्ष जांच की इस पूरे घटनाक्रम ने जनपद पंचायत मरवाही की कार्यप्रणाली को संदेह के घेरे में ला दिया है। अब जरूरत है एक स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की, ताकि यह स्पष्ट हो सके..?
















