LIVE UPDATE
झमाझम खबरेंदुनियादेशप्रदेशराजनीतीरायपुर

जनपद पंचायत मरवाही में ‘जांच बनाम भुगतान’ का खेल! —”पंचायत इंस्पेक्टर शिव प्रसाद मरकाम”खुद ही पास, खुद ही जांच, खुद ही क्लीनचिट..?

जनपद पंचायत मरवाही में ‘जांच बनाम भुगतान’ का खेल! —”पंचायत इंस्पेक्टर शिव प्रसाद मरकाम”खुद ही पास, खुद ही जांच, खुद ही क्लीनचिट..?

गौरेला पेंड्रा मरवाही,- जनपद पंचायत मरवाही में 15वें वित्त आयोग की राशि को लेकर एक बेहद गंभीर और रहस्यमयी सिस्टम सामने आ रहा है, जिसने पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। दस्तावेजों और स्थानीय सूत्रों के अनुसार, पंचायत इंस्पेक्टर शिव प्रसाद मरकाम की भूमिका इस पूरे मामले में केंद्र में दिखाई दे रही है।

ये खबर भी पढ़ें…
रिटायरमेंट से पहले ‘उगाही का दबाव’! प्राचार्य संतोष राठौर ने BEO पर रिश्वत और जान से मारने की धमकी के लगाए संगीन आरोप”
रिटायरमेंट से पहले ‘उगाही का दबाव’! प्राचार्य संतोष राठौर ने BEO पर रिश्वत और जान से मारने की धमकी के लगाए संगीन आरोप”
April 19, 2026
रिटायरमेंट से पहले ‘उगाही का दबाव’! प्राचार्य संतोष राठौर ने BEO पर रिश्वत और जान से मारने की धमकी के...
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

मामले के अनुसार, जब भी पंचायतों में 15वें वित्त की राशि का भुगतान होना होता है, तो प्रक्रिया कुछ इस तरह चलती है— पहले पंचायत इंस्पेक्टर द्वारा प्रस्ताव की जांच, फिर सरपंच/सचिव के डिजिटल सिग्नेचर (DSC), उसके बाद OTP जनरेशन और अंत में अप्रूवल देकर राशि जारी। यानी शुरुआत से अंत तक पूरा सिस्टम एक तय चैनल से संचालित होता है।

लेकिन असली सवाल तब खड़ा होता है जब इन्हीं भुगतानों में भ्रष्टाचार की शिकायत सामने आती है। शिकायत के बाद जांच के आदेश दिए जाते हैं— और हैरानी की बात यह कि जिस पंचायत इंस्पेक्टर ने भुगतान प्रक्रिया में भूमिका निभाई, उसी को जांच का जिम्मा सौंप दिया जाता है।
सबसे बड़ा सवाल:

ये खबर भी पढ़ें…
नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय का तीखा प्रहार, विपक्ष पर लगाया बाधा डालने का आरोप
नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय का तीखा प्रहार, विपक्ष पर लगाया बाधा डालने का आरोप
April 19, 2026
नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय का तीखा प्रहार, विपक्ष पर लगाया बाधा डालने का आरोप...
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

क्या भुगतान प्रक्रिया में शामिल अधिकारी ही जांच अधिकारी बन सकता है? यदि हां, तो निष्पक्षता की गारंटी कौन देगा?
सूत्र बताते हैं कि जांच के नाम पर ‘चैनल बदलने’ का खेल भी चलता है, जहां लेन-देन के जरिए फाइलों का रुख मोड़ा जाता है और मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। इससे यह संदेह और गहरा हो जाता है कि कहीं पूरा सिस्टम ही सेटिंग पर तो नहीं चल रहा?

जिम्मेदारी तय कौन करेगा? जब भुगतान के लिए सरपंच-सचिव का DSC और OTP जरूरी है, और अप्रूवल भी एक तय प्रक्रिया से होता है, तो आखिर जिम्मेदारी किसकी बनती है?
नियमों की अनदेखी या मनमानी? वित्तीय मामलों में पंचायत इंस्पेक्टर द्वारा न केवल भुगतान प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभाना, बल्कि बाद में खुद ही जांच और कार्यवाही के आदेश देना— यह प्रशासनिक नियमों और पारदर्शिता पर सीधा प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है।
और तो और, कार्रवाई के दौरान यह तर्क दिया जाता है कि “सीईओ साहब छुट्टी पर थे”, इसलिए निर्णय लिया गया। सवाल उठता है कि क्या वित्तीय मामलों में इतनी बड़ी शक्तियां पंचायत इंस्पेक्टर को दी गई हैं?
मांग उठी निष्पक्ष जांच की इस पूरे घटनाक्रम ने जनपद पंचायत मरवाही की कार्यप्रणाली को संदेह के घेरे में ला दिया है। अब जरूरत है एक स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की, ताकि यह स्पष्ट हो सके..?

ये खबर भी पढ़ें…
जिले में शिक्षा व्यवस्था का ‘डबल फेल’! न स्कूल में शिक्षक, न हॉस्टल में जिम्मेदारी—फिर भी वेतन जारी, 5 हजार सेटिंग की चर्चा से मचा हड़कंप….!
जिले में शिक्षा व्यवस्था का ‘डबल फेल’! न स्कूल में शिक्षक, न हॉस्टल में जिम्मेदारी—फिर भी वेतन जारी, 5 हजार सेटिंग की चर्चा से मचा हड़कंप….!
April 19, 2026
जिले में शिक्षा व्यवस्था का ‘डबल फेल’! न स्कूल में शिक्षक, न हॉस्टल में जिम्मेदारी—फिर भी वेतन जारी, 5 हजार...
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

Back to top button
error: Content is protected !!